डी फार्म योग्यताधारी के लिए रोजगार के अवसर

डी फार्म योग्यताधारी के लिए रोजगार के अवसर – डी फार्म कोर्स का मतलब है डिप्लोमा इन फार्मेसी कोर्स. यह कोर्स फार्मेसी स्ट्रीम का सबसे बेसिक कोर्स है. यह दो वर्षीय कोर्स है जिसे पूर्ण करने के बाद में इसका सर्टिफिकेट मिल जाता है.

इस कोर्स को पूर्ण करने के बाद में सम्बंधित राज्य की फार्मेसी कौंसिल में रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है. मतलब यह है कि डिप्लोमा इन फार्मेसी की पढाई पूर्ण करने के पश्चात आप रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के रूप में अपनी सेवाएँ दे सकते हैं.

सबसे पहले तो हम इस सम्बन्ध में बात करेंगे कि डी फार्म योग्यताधारी रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट अपनी सेवा किस क्षेत्र में दे सकता है और डी फार्म योग्यताधारी फार्मासिस्ट के लिए रोजगार के क्या-क्या अवसर हैं.

एक डी फार्म योग्यताधारी रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के लिए रोजगार का सबसे बड़ा अवसर है स्वयं की दवा की दुकान शुरू करना. अधिकाँश विद्यार्थी इस वजह से ही इस कोर्स में प्रवेश लेते हैं.

समाज में दवा की दुकान को मेडिकल स्टोर के नाम से जाना जाता है लेकिन मेरे हिसाब से मेडिकल स्टोर सही नाम नहीं है.

मैंने अब तक फार्मेसी से सम्बंधित किसी भी एक्ट में मेडिकल स्टोर टर्म ना तो देखी है और ना सुनी है. सभी जगह ड्रग स्टोर का प्रयोग होते देखा है. मेडिकल स्टोर शब्द कहाँ से आया यह सोचने का विषय है. हम मेडिकल स्टोर की जगह फार्मेसी शब्द का प्रयोग करेंगे.

खैर यह एक अलग मुद्दा है, हमें अभी डी फार्म के बाद रोजगार के अवसरों पर ही अपनी बात को केन्द्रित करना होगा. मैं आपको बता रहा था कि जितने लोग डी फार्म कोर्स में प्रवेश लेते हैं उनमे अधिकाँश लोग अपनी स्वयं की फार्मेसी शुरू करने के लिए ही इसमें प्रवेश लेते हैं.

दरअसल भारत में दवाओं के व्यापार को प्रतिष्ठित व्यापार माना जाता है. लेकिन इस व्यापार को करने के लिए राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग से ड्रग लाइसेंस के रूप में अनुमति लेनी होती है. इस व्यापार को करने के लिए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की आवश्यकता होती है.

यह रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट या तो फार्मेसी का ओनर स्वयं हो सकता है या फिर ओनर को अपनी फार्मेसी के लिए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट को नौकरी पर रखना पड़ता है. बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के कोई भी अपनी फार्मेसी शुरू नहीं कर सकता है.

यहाँ पर हमें इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना होगा कि फार्मेसी पर कार्य करने वाला फार्मासिस्ट एक पूर्णकालिक एम्प्लोई होता है. मतलब कि एक फार्मेसी पर कार्य करने वाला फार्मासिस्ट उस फार्मेसी के अतिरिक्त अन्य किसी भी जगह कार्य नहीं कर सकता है.

अगर एक फार्मेसी पर कार्य करने वाला फार्मासिस्ट किसी अन्य फार्मेसी पर या किसी कॉलेज में या अन्य कहीं पर भी नौकरी करते हुए पाया जाता है तो उस पर नियमानुसार कानूनन कार्यवाही हो सकती है.

हमें इस बात को अपने दिमाग में रखना होगा कि अगर कोई फार्मेसी किसी फार्मासिस्ट की वजह से कार्य कर रही है तो वह फार्मासिस्ट उस फार्मेसी पर सम्पूर्ण दवा वितरण के लिए भी जिम्मेदार होता है.

अमूमन यह देखने और सुनने में आता है कि बहुत सी फार्मेसियों पर फार्मासिस्ट फिजिकली प्रेजेंट नहीं होते हैं, केवल उनका नाम चलता रहता है. ऐसे कागजी फार्मासिस्ट की जगह कोई अन्य व्यक्ति दवा वितरण का कार्य कर लेता है और ये कागजी फार्मासिस्ट अन्य कोई कार्य कर रहे होते हैं.

यह गलत है क्योंकि किसी भी फार्मेसी पर कार्यरत फार्मासिस्ट अन्य कही कार्य नहीं कर सकता है. जब भी कभी यह बात सामने आएगी तो उसे भारी मुसीबतों का सामना करना पड सकता है.

रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट रिटेल और होलसेल दोनों तरह के व्यापार को कर सकता है. रिटेल व्यापार की तरह होलसेल व्यापर के लिए भी फार्मासिस्ट की अनिवार्यता लागू की जा रही है लेकिन किसी न किसी दवाब की वजह से मामला ठन्डे बस्ते में पड़ा हुआ है.

डी फार्म योग्यताधारी फार्मासिस्ट अपनी फार्मेसी के अतिरिक्त सरकारी सेवाओं में भी जा सकता है. इन सरकारी सेवाओं में राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र सरकार के विभिन्न विभाग शामिल है जिनमे हॉस्पिटल्स के साथ-साथ रेलवे एवं विभिन्न उपक्रम शामिल हैं.

सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि ये बहुतायत में है. हमें इस सच्चाई को भी ध्यान में रखना होगा कि फार्मासिस्ट के लिए सरकारी सेवा में रोजगार के अवसर काफी कम है.

इसके साथ ही भारत सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना शुरू कर रखी है जिसके जरिए जन औषधि स्टोर के माध्यम से जेनेरिक मेडिसिन्स का व्यापार किया जाता है. फार्मासिस्ट के लिए इसमें भी अवसर हैं.

निजी क्षेत्र की बात की जाए तो कई बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल्स भी फार्मासिस्ट को जॉब देते हैं. आजकल कई कोर्पोरेट्स हाउसेस ने रिटेल फार्मेसी की चैन शुरू कर रखी है जिनमे भी रोजगार के अवसर तलाशे जा सकते हैं. अपोलो फार्मेसी इसका बड़ा उदहारण है.

आने वाला समय ऑनलाइन फार्मेसी या ई फार्मेसी का होगा जिनमे भी फार्मासिस्ट के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. अभी भी बहुत सी ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियाँ कार्य कर रही हैं जिनमे प्रिस्क्रिप्शन हैंडलिंग के लिए फार्मासिस्ट की आवश्यकता होती है.

शिक्षा के क्षेत्र की अगर बात की जाए तो सभी फार्मेसी कोलेजेस में लेबोरेटरी टेक्नीशियन के पद पर फार्मासिस्ट की आवश्यकता होती है. एक डी फार्म योग्यताधारी फार्मासिस्ट इन कोलेजेस में भी कार्य कर सकता है.

इस कोर्स के सम्बन्ध में एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि ये कोर्स मात्र एक डिप्लोमा स्तर का है. आप इस कोर्स को करने के बाद ग्रेजुएट नहीं माने जाते हैं. अतः आपको इस कोर्स के साथ-साथ अपनी ग्रेजुएशन भी कम्पलीट कर लेनी चाहिए.

अंत में यही कहा जा सकता है कि एक दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स के लिहाज से देखा जाए तो डी फार्म कोर्स में रोजगार के काफी अवसर हैं और अगर आपका मुख्य उद्देश्य अपनी फार्मेसी शुरू करना है तो यह कोर्स आपके लिए ही है.

Written by:
Ramesh Sharma
M Pharm, MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA, CHMS

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